Saturday, April 8, 2017

तेरी यादें

गुजरते वक़्त को
आवाज़ देते सुना
बिखरी यादों को
जब एक एक करके चुना

तन्हा नहीं
ग़म भी नहीं
बेरंग नहीं
पर रूहानी उमंग भी नहीं

सफ़र कर लेता हूँ खुद ही
वो सारे रास्ते
ढूंढ रखे थे
जो तेरे वास्ते

ग़ज़ल वही
जगह नई
लोग नये
पर आँखों में तस्वीर वही

याद है?
वो पहली बारिश की बुँदे
जब हम साथ
थे धम्म से कूदे

इस बार रास न आया
मिट्टी का यूँही भींगना
और ताज़ी खुशबु
फिर से बिखेरना

अक्सर आकर सहलाती मेरे बालों को
तुम्हारी यादों की उँगलियाँ
वो नर्म सुबह, वो सूर्ख शाम
वो खिलखिलाता हमारा आशियाँ

No comments:

Post a Comment