ज़िन्दगी है धूप सी
तू शीतल छइयाँ
आस पास सब बेरंग सा
तू बन आती सतरंगी मेरी दुनिया
उमस भरी उलझन हर तरफ
तू बहती हवा, लाती बदरिया
पट जाती हरियाली हर तरफ
हँस के तू गुजर जाती जिस डगरिया
तैर जाऊँ समंदर भी तुम तक
क्या साहिल, क्या उफनती कोई दरिया
हर पल काआभास, है तू मेरे आस पास
चाहे जितनी भी दूर हो तेरी नगरिया
