Saturday, April 8, 2017

गुफ़्तगू

उनसे गुफ़्तगू की
तमन्नाओं का सिलसिला
बन के नन्हा घास
जबसे मेरे बगीचे निकला

हर रोज़ सींचा
उम्मीदों ने इसे
हर रोज़ मुर्झाया,
हर रोज़ फिर खिला

तिनके की अहमियत
उनसे क्या जानिए
जिन्हें हर कदम,
नया हमराही आ मिला

ना रोष
दिखाया लहरों ने
ना जिनसे किनारों ने
बढ़ाया कभी फासला

1 comment:

  1. Tinkaa tinkaaaa zrraaa zraaa..hai roshni se jaise bhara...

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