Sunday, October 20, 2013

परछाई


सहसा सिमट गई वो बाहें
गुम हो चली वो लंबी राहें
धूप ही धूप फैला हर तरफ
जाने, कहाँ जा छुपी है छाँहें

खत्म हो चला एक सफर शायद
फरियाद भी है अब बेअसर शायद
दिये थे उम्मीद के तुम्ही बस
वो भी बुझने पर आज तुला शायद

इतनी हसरतें, इतने वादे
हंसी ख्वाब, और हंसी इरादे
कैसे भूलें? कैसे बिसरें?
अब तक के हमसफर, तू ही बता दे?

किसी की मौत की चुप्पी है
या किसी तबाही का मातम
कुछ भी, कोई भी तो नहीं दूर-दूर
बस ना-उम्मीदी और हम

क्यूं यूँ लगा की तुम करीब आ गए थे,
ठीक अभी, इस पल से पहले,
सचमुच, ज़मीं पर, यहीं मेरे सामने
सोचा, चलो, यही ज़िंदगी है, लगा लें गले

पर नहीं, फिर करा दिया तुमने यकीं,
कि तुम अभी दूर थी, बहुत दूर
जो था मेरे मन में अब तक
बस था एक फितूर

और वो जो था स्थिर दरिया में
देख जिसे, छलांग लगाने की सोच रहा था
बस तुम्हारी परछाई थी
नहीं, तू इतनी भी करीब नहीं आई थी।

(The Baobab tree, also known as Adansonia, was photographed in the Western DR of Congo)

2 comments:

  1. Wow.. Kya baat hai
    Iss Hunar ka Abhass toh tha pahle bhi
    Par Agaaz hua hai Abhi....
    Keep it up

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