उसने मेरा काम आसान कर दिया
अपने दर से मुझे अनजान कर दिया
किसी तबाही की अब जरूरत नहीं
मेरी गली यूँही वीरान कर दिया
बग़ैर जले मोम पिघल के बह गए
रंग-ए-लफ़्ज़ बिन सब बेरंग रह गए
दिए जलाये थे पड़ोसी ने किसी जश्न में
मेरे अरमां उम्मीद-ए-जुगनू बन गए
कभी इस दिया, कभी उस दिया
तेरी परछाई ढूंढ़ते रह गए
nice writings
ReplyDeleteWah !
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