घास
नन्हें कोमल घास
हरयाली के प्रतीक घास
बाग़ बगीचों में घास
राह पगडंडियों पे घास
देसी घास
विदेशी घास
खेल के मैदानों में
खेतों और खलिहानों में
उखड़ती, फिर पनपती घास
कहीं सिंची
कहीं अनसिंची घास
गर्म धूप, बारिश
बर्फ और ओले
सब सहते घास
बढ़ते ही
किसी मवेशी का चारा
बनते घास
ओस की मोतियों को सँजोते घास
नए दिन का एहसास दिलाते घास
खुदपे चलने वालों के तलवे सहलाते घास
इक ज़मी, इक आसमाँ
बिन फले-फूले, बिन कोई आस
खिलती, कुम्हलाती घास
यूँही पनपते, रौंदे जाते घास
ज़मीं जकड़े
बिन चीखे
चुपचाप सहते
खुद में सिमटते घास
रात होने पर
चाँदनी में नहलाते घास
अगली सुबह, फिर तरो ताज़ा
हो जाते घास
फिर बन जाते
किसी की हरियाली के
प्रतीक ये घास
Intense ..
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